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फसाना ए बेकरार दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख्वाहिशें जब बार बार बढ़ने लगे तो नाकामियां मुंह छुपाने लगे लाकर तुम्हें दिल में इक बार सच सारा बताना पड़ा
        
                                                    
                            
मुझे बार बार बदनाम करने वाले हुआ जो दर्द तुमने जाना कहां ये सच सारा बड़े सलीके से हमें तुमको बताना पड़ा
छीन कर हक मेरा जीने का अच्छा ना किया तुने बना के बहाना बढ़ाया अब फासला तुमसे ये सच हमें बताना पड़ा
करके मायूस हमें अब आप ही इरादा बदलने लगे जिंदगी मेरी सेज कांटों की खुदा कसम सच सारा बताना पड़ा
देकर हिसाब बरबादियों का किसी से मिला है कब चैन ओ सकूं किसी को परख के बेखुदी तेरी ये सच बताना पड़ा
एक महीने पहले
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