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फसाना ए बेकरार दिल

                
                                                         
                            ख्वाहिशें जब बार बार बढ़ने लगे तो नाकामियां मुंह छुपाने लगे लाकर तुम्हें दिल में इक बार सच सारा बताना पड़ा
                                                                 
                            
मुझे बार बार बदनाम करने वाले हुआ जो दर्द तुमने जाना कहां ये सच सारा बड़े सलीके से हमें तुमको बताना पड़ा
छीन कर हक मेरा जीने का अच्छा ना किया तुने बना के बहाना बढ़ाया अब फासला तुमसे ये सच हमें बताना पड़ा
करके मायूस हमें अब आप ही इरादा बदलने लगे जिंदगी मेरी सेज कांटों की खुदा कसम सच सारा बताना पड़ा
देकर हिसाब बरबादियों का किसी से मिला है कब चैन ओ सकूं किसी को परख के बेखुदी तेरी ये सच बताना पड़ा
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एक घंटा पहले

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