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फसाना ए बेचैन दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बगैर तेरे गली बे जान सी लगती है रात होते पूरी सुनसान हो जाती है इसीलिए सन्नाटा देख के लौट आए हैं
        
                                                    
                            
जबसे नज़र अंदाज़ हमें किया तुमने बदलते हालात से दिल लगा लिया मैने जान कर इरादा तेरा लौट आए हैं
निकले थे घर से इस बार तैयारी के साथ तुमसे मिलने वास्ते साथ तेरे चलना न हुआ नसीब तो लौट आए हैं
सच तो ये इज़हार किया मैने ही तुमसे कई बार उठा के नज़र तुमने देखा नहीं तो होकर मजबूर लौट आए हैं
शाम कर देता बेचैन हमें तेरी यादों से दिल बहला रहे कश्ती बदलना आया नहीं बीच दरिया से लौट आए हैं
एक घंटा पहले
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Shivam Awasthi

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