बगैर तेरे गली बे जान सी लगती है रात होते पूरी सुनसान हो जाती है इसीलिए सन्नाटा देख के लौट आए हैं
जबसे नज़र अंदाज़ हमें किया तुमने बदलते हालात से दिल लगा लिया मैने जान कर इरादा तेरा लौट आए हैं
निकले थे घर से इस बार तैयारी के साथ तुमसे मिलने वास्ते साथ तेरे चलना न हुआ नसीब तो लौट आए हैं
सच तो ये इज़हार किया मैने ही तुमसे कई बार उठा के नज़र तुमने देखा नहीं तो होकर मजबूर लौट आए हैं
शाम कर देता बेचैन हमें तेरी यादों से दिल बहला रहे कश्ती बदलना आया नहीं बीच दरिया से लौट आए हैं
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