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फसाना ए बेचैन दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी ही सिफारिश मैं तुमसे कर रहा हूं और सामने तेरे आकर अब मैं बिखर रहा हूं
        
                                                    
                            
करके आरजू तुमसे बार बार सर जितना झुका रहा हूं उतना ही अब मैं उभर रहा हूं
गर्दिश ए हालात ने किया हमें नाकाम इसीलिए जहां जाना नहीं वहां से गुज़र रहा हूं
ना हो यकीं मुझ पे तो पूछ लो हाल मेरा किसी और से सच ये मैं ही बिखर रहा हूं
होकर खामोश गम अपना तुम्हें सुनाऊं कैसे होकर नाकाम अब मैं ही बिखर रहा हूं
13 घंटे पहले
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