अपनी ही सिफारिश मैं तुमसे कर रहा हूं और सामने तेरे आकर अब मैं बिखर रहा हूं
करके आरजू तुमसे बार बार सर जितना झुका रहा हूं उतना ही अब मैं उभर रहा हूं
गर्दिश ए हालात ने किया हमें नाकाम इसीलिए जहां जाना नहीं वहां से गुज़र रहा हूं
ना हो यकीं मुझ पे तो पूछ लो हाल मेरा किसी और से सच ये मैं ही बिखर रहा हूं
होकर खामोश गम अपना तुम्हें सुनाऊं कैसे होकर नाकाम अब मैं ही बिखर रहा हूं
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