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फसाना ए बेचैन दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुआ दिल मेरा जख्मी कितना सोच के घबराए हम बहुत करके मशवरा दिल से सब्र करना पड़ा
        
                                                    
                            
होकर मजबूर अपनी आदत से गिला तुमसे कर ना पाया बुझा कर चिराग ए दिल दर्द सहना पड़ा
गर हो खुश मेरे हाल ए गम पे तो कोई बात नही सता के दिल को बार बार तुमसे सच कहना पड़ा
करके तुम मनमानियां अपनी चिराग़ दिल का भी बुझा दोगे होगा जो दर्द हमें ये सच कहना पड़ा
2 महीने पहले
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