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फसाना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            हुआ दिल मेरा जख्मी कितना सोच के घबराए हम बहुत करके मशवरा दिल से सब्र करना पड़ा
                                                                 
                            
होकर मजबूर अपनी आदत से गिला तुमसे कर ना पाया बुझा कर चिराग ए दिल दर्द सहना पड़ा
गर हो खुश मेरे हाल ए गम पे तो कोई बात नही सता के दिल को बार बार तुमसे सच कहना पड़ा
करके तुम मनमानियां अपनी चिराग़ दिल का भी बुझा दोगे होगा जो दर्द हमें ये सच कहना पड़ा
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2 महीने पहले

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