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फसाना ए बेबस जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके इक सवाल मुझसे तुम क्या सोच रहे बढ़ा कर
        
                                                    
                            
हौसला दिल का फिर अरमां सारे मिटा रहे हो

मैं इतना खुशनसीब नहीं जो बढ़ा कर हौसला करीब
तेरे आ सकूं समझ कर नादां दर्द बढ़ा रहे हो

मेरी खुशी को तुमने अपना कभी जाना कहां बुझा के
चिराग़ दिल मेरा तुम ही कुछ दर्द बढ़ा रहे हो

जाओ चिराग़ ठिकाना कहीं और ढूंढ लो उलझा कर
हमें फरेबी उजालों में दर्द तुम और बढ़ा रहे हो

खाकर ठोकरें बार बार आए आज हम सामने
तेरे और समझा कर जीने का मसला हमको सता रहे हो
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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