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दास्तां ए महरूम जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बढ़ा कर मुश्किलें अपनी जीना हराम कर देंगे गर हो ना सकेगा कभी खिलाफ तेरा तो दिल को परेशान कर देंगे
        
                                                    
                            
सुन कर फरमान तुम्हारा झुका कर सर कलम बेजुबान कर देंगे करेगा जब तू हुक्म मुताबिक हम बयान कर देंगे
देखा तुम्हें बाद मुद्दत तो सर चकरा गया बढ़ी ख्वाहिशें इतनी कि छुपा के अरमां सारे तुम्हें हम सलाम कर देंगे
चल कर अंधेरों में किस्मत अपनी आजमा रहा हूं आया जो दौर अच्छा बुरा जिंदगी में उसे हम सरे आम कर देंगे
ना जाने क्यूं इस मोड़ पर सूझी है आपको बिछड़ने की फासला मुझसे बढ़ाने वाले जीना अपना नाकाम कर देंगे
3 महीने पहले
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