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दास्तां ए महरूम जिंदगी

                
                                                         
                            बढ़ा कर मुश्किलें अपनी जीना हराम कर देंगे गर हो ना सकेगा कभी खिलाफ तेरा तो दिल को परेशान कर देंगे
                                                                 
                            
सुन कर फरमान तुम्हारा झुका कर सर कलम बेजुबान कर देंगे करेगा जब तू हुक्म मुताबिक हम बयान कर देंगे
देखा तुम्हें बाद मुद्दत तो सर चकरा गया बढ़ी ख्वाहिशें इतनी कि छुपा के अरमां सारे तुम्हें हम सलाम कर देंगे
चल कर अंधेरों में किस्मत अपनी आजमा रहा हूं आया जो दौर अच्छा बुरा जिंदगी में उसे हम सरे आम कर देंगे
ना जाने क्यूं इस मोड़ पर सूझी है आपको बिछड़ने की फासला मुझसे बढ़ाने वाले जीना अपना नाकाम कर देंगे
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3 महीने पहले

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