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दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सरकती यादों को बिखरने से रोकना पड़ा खुशी मिले या
        
                                                    
                            
ना मिले जला के चिराग़ दिल में अरमां समेटना पड़ा

तुम समझ ना सके रस्म ए वफा मेरी किया है किस तक
मोहब्बत तुमसे होकर मायूस खिलाफ तेरा करना पड़ा

काम चिरागों तुम समझ ना पाए कभी बढ़ा कर हौसला
जीने से फायदा क्या है ये सच आज तुमसे कहना पड़ा

रही जिंदगी मेरी आसान कब ये तुम क्या जानो चल कर
कांटों की राह पे तेरी मर्जी के खिलाफ हमें चलना पड़ा

तू ही ना मिला तो क्या हुआ हसरतें दिल की हमें मिटाना पड़ा
रोने से होगा कुछ नहीं मुकाबला तेरा करना पड़ा
2 महीने पहले
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