सरकती यादों को बिखरने से रोकना पड़ा खुशी मिले या
ना मिले जला के चिराग़ दिल में अरमां समेटना पड़ा
तुम समझ ना सके रस्म ए वफा मेरी किया है किस तक
मोहब्बत तुमसे होकर मायूस खिलाफ तेरा करना पड़ा
काम चिरागों तुम समझ ना पाए कभी बढ़ा कर हौसला
जीने से फायदा क्या है ये सच आज तुमसे कहना पड़ा
रही जिंदगी मेरी आसान कब ये तुम क्या जानो चल कर
कांटों की राह पे तेरी मर्जी के खिलाफ हमें चलना पड़ा
तू ही ना मिला तो क्या हुआ हसरतें दिल की हमें मिटाना पड़ा
रोने से होगा कुछ नहीं मुकाबला तेरा करना पड़ा
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