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दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे ज़ख्मों पे नमक छिड़कने वाले बताओ अचानक ख्याल मेरा आया कैसे देख कर तुम्हें दिल को खबरदार करना पड़ा
        
                                                    
                            
सच ये मिल के होना जुदा आसान कहां या रब तुने जो किया है कमाल बढ़ा कर अरमां हमें दिल को बेकरार करना पड़ा
ये दिल का मामला है दर्द अपना भी कहना तुमसे आसान नहीं सोच के राह ए वफा मायूस दिल को गिरफ्तार करना पड़ा
चला था मैं दर्द ए दिल बताने जान कर मिजाज़ आपका खोकर चैन ओ सकूं बढ़ा के बेचैनियां दिल को बीमार करना पड़ा
बदनसीबी से बढ़ कर सजा नही तुम भी जानते हो राह ए वफा आजमा कर बार बार तुम्हें दिल को असरदार करना पड़ा
3 महीने पहले
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