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दर्द ओ तमन्ना

                
                                                         
                            मेरे ज़ख्मों पे नमक छिड़कने वाले बताओ अचानक ख्याल मेरा आया कैसे देख कर तुम्हें दिल को खबरदार करना पड़ा
                                                                 
                            
सच ये मिल के होना जुदा आसान कहां या रब तुने जो किया है कमाल बढ़ा कर अरमां हमें दिल को बेकरार करना पड़ा
ये दिल का मामला है दर्द अपना भी कहना तुमसे आसान नहीं सोच के राह ए वफा मायूस दिल को गिरफ्तार करना पड़ा
चला था मैं दर्द ए दिल बताने जान कर मिजाज़ आपका खोकर चैन ओ सकूं बढ़ा के बेचैनियां दिल को बीमार करना पड़ा
बदनसीबी से बढ़ कर सजा नही तुम भी जानते हो राह ए वफा आजमा कर बार बार तुम्हें दिल को असरदार करना पड़ा
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3 महीने पहले

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