बढ़ा कर बेकरारी मेरी लम्हें इंतजार के दर्द बढ़ाने लगे हैं होकर मायूस महरूमी से फासला हम बढ़ाने लगे है
बसे थे दिल में जो मेरे मजबूरियां अब बढ़ाने लगे होकर मायूस अपनी जिंदगी से चिराग ए दिल बुझाने लगे हैं
करके दोस्ती कांटों से दर्द समेटने लगे बिछड़ के तुमसे करूं मैं क्या दिया जो दर्द तुमने अंजाम सोचने लगे हैं
सीखा दिया तेरी बेवफाई ने हमें घुट घुट कर जीना तो करूं मैं क्या मिटा के अरमां तुम्हें हम आजमाने लगे हैं