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दर्द ए बेकरार दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बढ़ा कर बेकरारी मेरी लम्हें इंतजार के दर्द बढ़ाने लगे हैं होकर मायूस महरूमी से फासला हम बढ़ाने लगे है
        
                                                    
                            
बसे थे दिल में जो मेरे मजबूरियां अब बढ़ाने लगे होकर मायूस अपनी जिंदगी से चिराग ए दिल बुझाने लगे हैं
करके दोस्ती कांटों से दर्द समेटने लगे बिछड़ के तुमसे करूं मैं क्या दिया जो दर्द तुमने अंजाम सोचने लगे हैं
सीखा दिया तेरी बेवफाई ने हमें घुट घुट कर जीना तो करूं मैं क्या मिटा के अरमां तुम्हें हम आजमाने लगे हैं
2 घंटे पहले
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