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दर्द ए बेचैन ख्वाहिशें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमी क्या है मुझमें जो देख कर मुंह मोड़ने लगे बुझा कर दिया आस का दिल में मेरे आप अब अंधेरा बढ़ाने लगे
        
                                                    
                            
कहना तो था बहुत आपसे फिर भी चुप रहना पड़ा हमें बढ़ा के बेचैनी दिल में होकर मायूस अश्क हम बहाने लगे
तुमने भी क्या सोच के अहसान फरामोश हमें समझ लिया चल के कांटों के राह पर चिराग ए दिल हम बुझाने लगे
अब तो बड़े सलीके से ऐतबार आप पर हमें करना पड़ेगा देकर दुआएं तुम्हें बार बार तह ए दिल से समझाने लगे
नक्श ए दिल पे जो बीती है कह ना पाया किसी और से बिछड़ कर तुमसे इस बार मुसीबतें अपनी ही बढ़ाने लगे

 
एक महीने पहले
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