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बेचैन तमन्ना ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिटा कर दिल के अरमां हम आंसू बहाने लगे हम ही ना रहे तेरे प्यार के काबिल सोच कर घबराने लगे
        
                                                    
                            
बुझा दो चिराग ए मोहब्बत कहने लगे नहीं अब फरेबी उजालों की जरूरत सोच के फासला बढ़ाने लगे
लिखा जो किस्मत हो चुका हमें भी नहीं अब जरूरत सवालों की सोच के सच अब तुमसे दूर होने लगे
ये बताओ हमें जुल्म तेरा कब तक जमा रहेगा मुझ पे मिजाज़ तेरा ही अब भांपने करीब हम आने लगे
तेरा ये शौक पहले दोस्ती फिर दुश्मनी करना परख के अब मैं करूं क्या ख्वाबों से ही दिल बहलाने लगे
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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