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बेचैन दिल की ख्वाहिशें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हक जीने का छीन लिया आपने दर्द बढ़ाना पड़ा बहुत चल कर कांटों की राह दिल को हमें समझाना पड़ा बहुत
        
                                                    
                            
जाओ बेचैन ख्वाब मत करो मनमानियां अब और खाकर धोखे बार बार तड़पती तमन्नाओं को मनाना पड़ा बहुत
होकर खामोश फलसफा जिंदगी का सोचना पड़ा हमें समेट के बिखरती तमन्नाओं को अब दर्द बढ़ाना पड़ा बहुत
परख कर महरूमी अपनी फासला तुमसे ही बढ़ाना पड़ा होकर मायूस वफा से हमें तो दिल को सताना पड़ा बहुत
है अश्क आंखों में और दिल बेचैन बगैर तेरे लाकर मायूसी दिल में बदल के फैसला दर्द अब हमें बढ़ाना पड़ा बहुत

 
2 महीने पहले
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