हक जीने का छीन लिया आपने दर्द बढ़ाना पड़ा बहुत चल कर कांटों की राह दिल को हमें समझाना पड़ा बहुत
जाओ बेचैन ख्वाब मत करो मनमानियां अब और खाकर धोखे बार बार तड़पती तमन्नाओं को मनाना पड़ा बहुत
होकर खामोश फलसफा जिंदगी का सोचना पड़ा हमें समेट के बिखरती तमन्नाओं को अब दर्द बढ़ाना पड़ा बहुत
परख कर महरूमी अपनी फासला तुमसे ही बढ़ाना पड़ा होकर मायूस वफा से हमें तो दिल को सताना पड़ा बहुत
है अश्क आंखों में और दिल बेचैन बगैर तेरे लाकर मायूसी दिल में बदल के फैसला दर्द अब हमें बढ़ाना पड़ा बहुत
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