गुजारना वक्त हुआ मुश्किल जिंदा मगर सकूं ना हम पा सके कभी घुट घुट कर जीना पड़ा हमें
हाल ये कि जीने का कोई शौक नहीं फिर भी जीना पड़ा हमें करूं क्या मजबूर होना पड़ा हमें
मिजाज़ वक्त का जान कर मायूस हुआ जिंदगी के सफर में भी दुश्मन से हाथ मिलाना पड़ा हमें
महफिल में उस जगह आ बैठा जहां मुश्किल है नज़र मिलाना तुमसे सोच के पछताना पड़ा हमें
सारे चेहरों से अलग तेरा चेहरा परखना पड़ा तुझको हमें अब नाकामियों से दिल लगाना पड़ा हमें