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अंदाज ए बेरुखी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुजारना वक्त हुआ मुश्किल जिंदा मगर सकूं ना हम पा सके कभी घुट घुट कर जीना पड़ा हमें
        
                                                    
                            
हाल ये कि जीने का कोई शौक नहीं फिर भी जीना पड़ा हमें करूं क्या मजबूर होना पड़ा हमें
मिजाज़ वक्त का जान कर मायूस हुआ जिंदगी के सफर में भी दुश्मन से हाथ मिलाना पड़ा हमें
महफिल में उस जगह आ बैठा जहां मुश्किल है नज़र मिलाना तुमसे सोच के पछताना पड़ा हमें
सारे चेहरों से अलग तेरा चेहरा परखना पड़ा तुझको हमें अब नाकामियों से दिल लगाना पड़ा हमें
 
2 वर्ष पहले
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