विज्ञापन

अफसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे दर से बार बार गुजरने को जी चाहता है मिल कर तुमसे हर बार हाल ए गम अपना सुनाने को जी चाहता है
        
                                                    
                            
सिवा तेरे मेरा भी कोई नहीं इस दुनिया में बात दिल की सुना के रफ्ता रफ्ता तुमसे दिल लगाने को जी चाहता हैं
मिले आज बाद मुद्दत हमसे कहो तो आजमा लें तुझे दिल में जला कर दिया अब अर्ज करने को जी चाहता है
तुम ही न समझ सके मोहब्बत मेरी कुछ और देकर दर्द हमें ही आजमा लो जख्म और खाने को जी चाहता है
राह ए तलब पांव तेरे डगमगाए क्यूं आजमाया नहीं तूने हमें अब मैं कहूं भी क्या दिल तोड़ने को जी चाहता है
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

637 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10393 कविताएं

View Profile