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अफसाना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परख कर महरूमी अपनी हुआ जो दर्द सोचना पड़ा बढ़ा कर दर्द ओ तमन्ना करूं मैं गिला किस किस से सोचना पड़ा है
        
                                                    
                            
करके सामना गर्दिश ए हालात से चिराग़ ए दिल बुझा रहा हूं ये जिंदगी इक हादसा है मेरे लिए ये सच तुमसे कहना पड़ा है
परख के गुस्ताखियां अपनी क्या खोया क्या पाया ये सोचा करो लाकर तुम्हें ख्वाब में भी अब दर्द ओ तमन्ना कहना पड़ा है
हुआ तू रुखसत जब से दर्द और बढ़ाना पड़ा हमें इल्म रोने का सीखा नहीं फिर भी थाम कर दिल अपना अब रोना पड़ा है
होकर मायूस अपनी ही किस्मत से मिटा कर हसरतें सारी किया जो जुल्म ओ सितम मुझ पे खुदा कसम दर्द बढ़ाना पड़ा है
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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