माफ करना कोई इक हादसा होगा जरूर तू भी मुझसे नाखुश आखिर किसी को कभी जुदा होना है
अच्छा ये हुआ मेरे जज्बा ए इजहार पे किया यकीं तूने आखिर कभी तो कोई इक अदा तेरा होना है
अजनबी शहर के अजनबी रस्ते भी होकर खफा जुदा होने लगे हो आखिर किसी को लापता होना है
ये ना सोचा कभी अकेला क्यूं चल रहा हूं दुश्मनों से भी किसी मोड़ पर आखिर सामना भी होना है
बात बात पर कोसने वाला क्या सोच कर उलझ गया आखिर तेरा भी तो मुझसे इक सुलह होना है