सब्र का जाम भर ना जाए कहीं,
तु भी हद से गुज़र ना जाए कहीं ।
मीठी बातें ना तुम किया करो,
मेरा दिल तुझ पे मर ना जाए कहीं।
चांद सा चेहरा तेरा लगता है,
लग तुझको नज़र ना जाए कहीं।
दिल में तुझको छुपा के रखूंगी,
तु इधर से उधर ना जाए कहीं।
तेरी तहरीर में नहीं हूं मैं
भूल रब का तु दर ना जाए कहीं ।
रात है और डर रही हूं मैं ,
ख़्वाब में तेरा हो बसर ना जाए कहीं।
छुपा के रखा है वजूद अपना ,
प्रेम गली से तू गुज़र ना जाए कहीं।