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दुश्वारियाँ अनजान हों तो कोई बात हो

Prashant Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात के दावे जहाँ पुरजोर होते हों,
        
                                                    
                            
पर सबेरा हो तो कोई बात हो।
विपरीत धारा के कोई चलने को कब बोला,
पर पार कोई हो तो कोई बात हो।
राह ज़ाहिर पर गुज़रने में भी कोई बात है,
दुश्वारियाँ अनजान हों तो कोई बात हो।
2 महीने पहले
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