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बिखरा हुआ मैं फिर से निखर जाए।

Prashant Dwivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं अब मैं नहीं रह गया,
        
                                                    
                            
कुछ और हो गया हूँ।
ज़िंदगी की कशमकश में
मैं खुद को ही भूल गया हूँ।
काश, ये जीवन फिर से सँवर जाए,
बिखरा हुआ मैं फिर से निखर जाए।
जो खो गया है मुझसे कहीं,
काश वो फिर से मुझे मिल जाए।
और मैं फिर लौट आऊँ
अपने ही उस जीवन में,
जहाँ मैं फिर से मैं रहूँ,
न कि किसी और का हिस्सा बन जाऊँ।
एक महीने पहले
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