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बिखरा हुआ मैं फिर से निखर जाए।

                
                                                         
                            मैं अब मैं नहीं रह गया,
                                                                 
                            
कुछ और हो गया हूँ।
ज़िंदगी की कशमकश में
मैं खुद को ही भूल गया हूँ।
काश, ये जीवन फिर से सँवर जाए,
बिखरा हुआ मैं फिर से निखर जाए।
जो खो गया है मुझसे कहीं,
काश वो फिर से मुझे मिल जाए।
और मैं फिर लौट आऊँ
अपने ही उस जीवन में,
जहाँ मैं फिर से मैं रहूँ,
न कि किसी और का हिस्सा बन जाऊँ।
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30 मिनट पहले

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