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यथार्थ सत्य

PRANJAL

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                            यथार्थ सत्य
        
                                                    
                            

असंख्य मिथकों से नहीं,
छिपता यथार्थ सत्य।
मिथकों की मृदा में,
स्वर्ण-सा चमकता सत्य॥

मिथक हैं
जल के बुलबुले,
स्वयं ही उठते,
स्वयं ही फूटते।
सत्य है यह तर्क,
यही यथार्थ सत्य॥

मिथकों की हो निशा,
या अंधकार घनघोर,
न छिपते चंद्र-सूर्य,
न सम्यक् वचन॥

     — प्रांजल मौर्य 'प्रखर'
एक घंटा पहले
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