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हाँ किसान हूँ मैं

Pramod Srivastav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हाँ किसान हूँ मैं, हाँ किसान हूँ मैं,
        
                                                    
                            
सरकार की भाषणों का श्रृंगार हूँ मैं,
हाँ किसान हूँ मैं, हाँ किसान हूँ मैं,
तपती धूप हो या हो जाड़ा बरसात,
मेड़ पर खड़ा होकर बर्बाद फसलों को निहारता किसान हूँ मैं,
हाँ किसान हूँ मैं, हाँ किसान हूँ मैं,
रत्ती भर अनाज को लिए बाजारों में फिरता बदहवास लाचार हूँ मैं,
हाँ किसान हूँ मैं, हाँ किसान हूँ मैं,
6 घंटे पहले
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