उथले पानी से लड़ रहे हैं हम,
गहराई में अब उतरना चाहिए।
साफ करना है गर अब गंदगी,
जड़ से सारी मिटाना चाहिए।
उनकी आदत है वार करना,
हमें भी अब मार देना चाहिए।
फिक्र अब खुदकी न करे कोई,
फिक्र अब उनको होना चाहिए।
कैसे जीतेंगे जब लड़ेंगे नहीं,
अब तो युद्ध करना चाहिए।
है शौर्य की न कमी कोई,
ये दुश्मन को बताना चाहिए।
चील कौवों को अब दावत दे,
दुश्मन को ललकारना चाहिए,
एक के बदले अब दस नहीं,
सारे के सारे सर हमें चाहिए।
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