राम रहीम में क्या रखा है
वह राम हैं रहीम हैं ,
वह ईश्वर हैं अल्लाह हैं ,
वह सत्य हैं सर्बब्यापी हैं ,
वह सिर्फ अयोध्या में नहीं हर भारतीय के दिल में है
जिसने ये दुनिया बनाया उसकी अस्तित्व को ले के लड़ रहे हैैैं हम ,
अपने ही घर से बेघर करके इंसाफ मांग रहे हैैैं हम
माना ये त्रेता नहीं कलि युग है ,
पर इतनी समझ तो मनुष्य में आज भी बाकी है,
क्या दे के पूजे तुझे सब तो तू-ने ही बनाया है ,
नाम में क्या रखा है काम से ही तो परिचय है
जो पुरा जग का मालिक है , उसे एक छोटी सी जगह की क्या ज़रूरत है ,
राम हो या रहीम हो उसे ये सस्ती राजनीति से क्या मतलब है ,
वह तो तब भी प्रजा के हित करते थे अब भी कर रहे हैैैं ,
नहीं तो इतने सालों से हम उसी मुद्दे को ले के कैसे जिन्दा हैैैं
मुद्दा ये नहीं है कि वह जगह राम का है या रहीम का है ,
मुद्दा ये है कि अयोध्या में शांति की ज़रुरत है ,
राम के दोहे तो कबीर भी लिखा करते थे ,
फिर भी वह हिन्दुओं के ही प्रिय हैं
ये मंदिर या मस्जिद ईश्वर ने ना बनाया है ,
ये मज़हब की बातें अल्लाह ने ना सिखाया है ,
जिनके लिए सब एक है ,
चाहे प्रार्थना हो या इबारत उससे क्या फर्क है
अयोध्या ना हिन्दुओं की है ना मुसलमानों की,
ये तो है एक अंग संपूर्ण भारत की ,
फिर ये विवा द कैसे हुआ दो धर्मों की ,
जब मालिक एक है तो ये दीवार किस बात की
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।