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कृष्ण अर्जुन वार्तालाप

Pradyuman Kr

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बातें करते हो बड़ी बड़ी पर तुम बोलो क्या कर पाओगे?
        
                                                    
                            
सामने खड़े हो दाऊ तुम्हारे बोलो तुम क्या लड़ पाओगे?
हुए क्रोधित फिर माधव रण में किंतु मन को शांत रखा,
समझाने को पार्थ के सम्मुख गीता का सिद्धांत रखा।
अर्जुन ये मत देखो युद्ध में कौन है अपना और पराया,
इस धरती पर कभी भी कोई साथ में कुछ भी ले ना आया।
बात यहां बस अपनो की ही होती तो मैं क्यों आता?
महा समर के इस रण में तुम्हारा सारथी मैं न बना होता।
धर्म अधर्म का युद्ध है ये, इसमें केवल तुम देखो धर्म,
इनके वजह से इनके सम्मुख जो जो हुए थे सोचो अधर्म।
इन अधर्मियों का नाश करना अब हाथ तुम्हारे आया है,
इन पापियों का अंत होना तो विधाता ने विधाया है।
तुम तो केवल एक श्रोत हो अर्जुन इस लीला के पात्र हो,
यह सब तो करता हूं मैं ही, केवल तुम एक कंकड़ मात्र हो।
एक वर्ष पहले
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