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खिलौना तुमको हम-दम चाहिए था

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे दिल को मरहम चाहिए था।
        
                                                    
                            
कोई तो नैन पुर-नम चाहिए था।।

कोई सुहबत कोई सुहरत को तरसे ।
हमें बस आपका ग़म चाहिए था।।

झटक के बुत तराशा तोड डाला।
खिलौना तुमको हम-दम चाहिए था।।

दिल ए बर्बाद इस चाक ए ज़िगर को
हसीं माशूक़ बरहम चाहिए था।।

मुहब्बत का जहां मेला हो लगता।
वही चाहत का संगम चाहिए था।।

कोई भजनों में बपतिस्मा में डूबा।
किसी को आब ए ज़मज़म चाहिए था।।

मैं कैसे मान लूं तुमने किया है ।
बलंदी का तो परचम चाहिए था ।।

परिंदा 'दीप' सूरज छू न पाया ।
परो में और दम-ख़म चाहिए था ।।
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
 
2 महीने पहले
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