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ज़माना फ़ानी है फ़ानी से यारो दिल लगाना क्या

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़माना फ़ानी है फ़ानी से यारो दिल लगाना क्या
        
                                                    
                            
फ़क़ीरों के लिए ये तंबू डेरा घर घराना क्या

ख़ुदारा याद कर ले मालिक-ए-कुल दो-जहानी को
तेरा क्या है नहीं ये लक्ष्य मर कर मोक्ष पाना क्या

चलो फिर इश्क़ की गहराई में हम डूब जाते हैं
बुनें फिर से वही हम स्नेह का वो ताना-बाना क्या

सिखाओ मत अदाकारी सभी आती है मुझको भी
तुम्हारे दिल में कुछ है और जुबाँ पर कुछ बताना क्या

करूँ जब बंद आँखो को दिखे बस नूर तेरा ही
शिवाले में वही मस्जिद में गिरजे में बताना क्या

मेरे माशूक की सूरत बसी है दिल के हुज़रा में
मुहब्बत हो गई है 'दीप' तुमसे अब छिपाना क्या
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
 
एक महीने पहले
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