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है पयाम-ए-दावत-ए-मय आ भी जाओ दोस्तों वास्ते बादा-कशी के दर खुला मेरा भी है

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल मुहब्बत प्यार उल्फ़त से भरा मेरा भी है
        
                                                    
                            
सच कहूंँ इश्क़-ए-हक़ीक़ी देवता मेरा भी है

मरकज़ी किरदार हूँ तेरी कहानी का प्रिये
इस रग-ए-दिल में हुआ अब दाखिला मेरा भी है

कुछ अलहदा सा है अपना भी ये अंदाज़-ए-बयां
कुछ निराला सोचने का ज़ाविया मेरा भी है

झाँक कर तो देख दिल में हूँ कहाँ तुझसे जुदा
दिल के हुजरे में तेरे नक्श़-ए-वफ़ा मेरा भी है

है पयाम-ए-दावत-ए-मय आ भी जाओ दोस्तों
वास्ते बादा-कशी के दर खुला मेरा भी है

दिल-लगी का है इरादा सुन ले ओ माह-ए-लका
चाँद सा महबूब हो इक मानना मेरा भी है

हाल-ए-दिल पूछो न यारो जी रहें हैं किस तरह
'दीप' अब इन आँधियों से सामना मेरा भी है
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
3 घंटे पहले
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Shivam Awasthi

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