दिल मुहब्बत प्यार उल्फ़त से भरा मेरा भी है
सच कहूंँ इश्क़-ए-हक़ीक़ी देवता मेरा भी है
मरकज़ी किरदार हूँ तेरी कहानी का प्रिये
इस रग-ए-दिल में हुआ अब दाखिला मेरा भी है
कुछ अलहदा सा है अपना भी ये अंदाज़-ए-बयां
कुछ निराला सोचने का ज़ाविया मेरा भी है
झाँक कर तो देख दिल में हूँ कहाँ तुझसे जुदा
दिल के हुजरे में तेरे नक्श़-ए-वफ़ा मेरा भी है
है पयाम-ए-दावत-ए-मय आ भी जाओ दोस्तों
वास्ते बादा-कशी के दर खुला मेरा भी है
दिल-लगी का है इरादा सुन ले ओ माह-ए-लका
चाँद सा महबूब हो इक मानना मेरा भी है
हाल-ए-दिल पूछो न यारो जी रहें हैं किस तरह
'दीप' अब इन आँधियों से सामना मेरा भी है
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
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