विज्ञापन

फलक पे मुझको बिठाने की बात करता है , कोई तो ख़्वाब दिखायेगा मेरी आंखों को

Pradeep Tiwari'Deep'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फिर इन्कलाब दिखायेगा मेरी आंखों को
        
                                                    
                            
सराब में वो डुबायेगा मेरी आंखों को

फलक पे मुझको बिठाने की बात करता है
कोई तो ख़्वाब दिखायेगा मेरी आंखों को

कभी पहाड़ कभी झरने बीच पर कोई
वो वादियों में घुमायेगा मेरी आंखों को

चढ़ा के झूट का चश्मा हसीन आंखों पर
मय ए फरेब पिलायेगा मेरी आंखों को

कोई तिलिस्म भी उसको बचा न पायेगा
गो आइना जो दिखायेगा मेरी आंखों को

कोई तो 'दीप' जलायेगा इन अंधेरों में
कोई तो सच भी बतायेगा मेरी आंखों को
-प्रदीप तिवारी
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Neet Biology

43 कविताएं

View Profile