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मोहलत की फ़ांस

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहते हैं सभी
        
                                                    
                            
कि मोहलत ज़िंदगी की
मिली है सभी को
ब्रह्मा से ही
लेकिन मोहलत ज़िंदगी की
करता है तय कभी
देश का कानून भी
सोचिए, गुज़रती क्या होगी
उस शख्स पर
जिसकी ज़िंदगी की तार
टूटने की मोहलत
कर दी है तय
कानून ने
उसके ह्रदय की
अकुलाहट
उसके अंतर्मन की
छटपटाहट को
कर सकता है क्या कोई
महसूस
सिवाय उसके
तभी सभी जीवों की
ज़िंदगी की मोहलत
रखी है छिपाकर
विधाता ने
ताकि जी सकें जीव
खुल कर
सभी अपनी-अपनी
आखरी सांस तक
न कर महसूस
मोहलत की फ़ांस।
2 दिन पहले
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