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मोहलत की फ़ांस

                
                                                         
                            कहते हैं सभी
                                                                 
                            
कि मोहलत ज़िंदगी की
मिली है सभी को
ब्रह्मा से ही
लेकिन मोहलत ज़िंदगी की
करता है तय कभी
देश का कानून भी
सोचिए, गुज़रती क्या होगी
उस शख्स पर
जिसकी ज़िंदगी की तार
टूटने की मोहलत
कर दी है तय
कानून ने
उसके ह्रदय की
अकुलाहट
उसके अंतर्मन की
छटपटाहट को
कर सकता है क्या कोई
महसूस
सिवाय उसके
तभी सभी जीवों की
ज़िंदगी की मोहलत
रखी है छिपाकर
विधाता ने
ताकि जी सकें जीव
खुल कर
सभी अपनी-अपनी
आखरी सांस तक
न कर महसूस
मोहलत की फ़ांस।
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23 घंटे पहले

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