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इज़हार गुस्से का

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आता है जब गुस्सा
        
                                                    
                            
किसी व्यक्ति को
तो कई बार उस गुस्से का
इज़हार
भी होता है भयंकर
कोई चीखता है
बुरी तरह से
तो कोई दे फेंकता है
हाथ में आई
किसी भी चीज़ को
तो कोई-कोई गुस्से के मारे
लग जाता है फाड़ने
अपनी कमीज़ और बनियान को ही
अमूमन हर गुस्से के
विस्फोट में होता है
कोई न कोई नुकसान
बस चीखने में ही
नहीं होता कोई भी नुकसान
मगर लगता है वह
सभी को नागवार
क्योंकि चीखकर गुस्से में
चला जाता वह व्यक्ति
शिष्टाचार के पार।
एक महीने पहले
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