विज्ञापन

इन्हें हज़ारों बार नमन

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी की ज़द्दोज़हद
        
                                                    
                            
देखी
जीने की जिजीविषा देखी
जीने की ज़िद करते
लोग देखें
मौत को धता देते जांबाज़
देखें
फिर भी कहती हंसकर
मौत
नहीं बच सकोगे मुझसे
बेशक सच है यह
लेकिन मौत के मुहं से
ज़िंदगी को खींचकर
लाने वाले भी
हैं वरेण्य बहुत
इन्हें हज़ारों बार
हमारा नमन
हैं कृपालु इनसे
जन-जन।
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajan

30 कविताएं

View Profile