ज़िंदगी की ज़द्दोज़हद
देखी
जीने की जिजीविषा देखी
जीने की ज़िद करते
लोग देखें
मौत को धता देते जांबाज़
देखें
फिर भी कहती हंसकर
मौत
नहीं बच सकोगे मुझसे
बेशक सच है यह
लेकिन मौत के मुहं से
ज़िंदगी को खींचकर
लाने वाले भी
हैं वरेण्य बहुत
इन्हें हज़ारों बार
हमारा नमन
हैं कृपालु इनसे
जन-जन।
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