आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इन्हें हज़ारों बार नमन

                
                                                         
                            ज़िंदगी की ज़द्दोज़हद
                                                                 
                            
देखी
जीने की जिजीविषा देखी
जीने की ज़िद करते
लोग देखें
मौत को धता देते जांबाज़
देखें
फिर भी कहती हंसकर
मौत
नहीं बच सकोगे मुझसे
बेशक सच है यह
लेकिन मौत के मुहं से
ज़िंदगी को खींचकर
लाने वाले भी
हैं वरेण्य बहुत
इन्हें हज़ारों बार
हमारा नमन
हैं कृपालु इनसे
जन-जन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर