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चाय की एक कड़क प्याली

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाय की एक कड़क प्याली से
        
                                                    
                            
संवरती है सुबह
और होती है सुहानी
शाम भी
कड़क प्याली से उठती भाप में
करता है मन
खो जाने को
सचमुच क्या भावना है जगाती
चाय की एक कड़क प्याली
मानवीय रिश्तों को
संवार कर
एक सूत्र में बांध कर
रखने वाली
चाय की प्याली
आली रे आली
मिलता चाय की प्याली पर
न्योता
होली हो या दीवाली।
एक महीने पहले
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