आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चाय की एक कड़क प्याली

                
                                                         
                            चाय की एक कड़क प्याली से
                                                                 
                            
संवरती है सुबह
और होती है सुहानी
शाम भी
कड़क प्याली से उठती भाप में
करता है मन
खो जाने को
सचमुच क्या भावना है जगाती
चाय की एक कड़क प्याली
मानवीय रिश्तों को
संवार कर
एक सूत्र में बांध कर
रखने वाली
चाय की प्याली
आली रे आली
मिलता चाय की प्याली पर
न्योता
होली हो या दीवाली।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर