विज्ञापन

बिगड़ रहा प्रकृति का संतुलन

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोयल की कूक
        
                                                    
                            
गोरैया की चहचहाहट
और पक्षियों के
मीठे बोल तो
पुराने काल की बातें ही
अब हो गई
लगती हैं
अब तो कौए, चील
हुए गिद्ध ही अधिकतर
आते हैं नज़र
उड़ान भरते
आसमान में
क्या पक्षियों पर भी
लगा है पड़ने
अब असर जलवायु परिवर्तन का?
संख्या मधुमक्खियों की भी
हो गई है कम
तथा हो गई हैं वे
आक्रामक भी अत्यधिक
रह जाएगा
इस तरह बिगड़कर
सारा संतुलन
प्रकृति का
अगर न चेते अब भी हम
तो देंगे न्योता
महा विनाश को हम।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all