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बिगड़ रहा प्रकृति का संतुलन

                
                                                         
                            कोयल की कूक
                                                                 
                            
गोरैया की चहचहाहट
और पक्षियों के
मीठे बोल तो
पुराने काल की बातें ही
अब हो गई
लगती हैं
अब तो कौए, चील
हुए गिद्ध ही अधिकतर
आते हैं नज़र
उड़ान भरते
आसमान में
क्या पक्षियों पर भी
लगा है पड़ने
अब असर जलवायु परिवर्तन का?
संख्या मधुमक्खियों की भी
हो गई है कम
तथा हो गई हैं वे
आक्रामक भी अत्यधिक
रह जाएगा
इस तरह बिगड़कर
सारा संतुलन
प्रकृति का
अगर न चेते अब भी हम
तो देंगे न्योता
महा विनाश को हम।
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3 महीने पहले

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