विज्ञापन

अहोभाव और अहंकार

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो मिला है
        
                                                    
                            
उसके लिए होना चाहिए
मन में अहोभाव
असल में
आत्मसंतुष्टि से ही
उपजता है अहोभाव
जबकि असंतुष्टि से
होता है पैदा
अहंकार
जो नहीं है
उसी के बारे में सोचते रहने से
होता है मन बेचैन
जबकि जो है पास
उसके एहसास से
होता है पैदा
मन में अहोभाव
अहोभाव से
लगते हैं पंख
अहोभाग्य के
जिससे खुलता है
उन्नति का पथ
जबकि अहंकार से
गिरना पड़ता है
घोर पतन के गर्त में
छिपा है
हर व्यक्ति के अंदर
एक सरोवर
यह सरोवर है
आत्मसंतुष्टि का
इस सरोवर में डूबना ही
है अहोभाव।
नहीं तो सब. कुछ होते हुए भी
दिखाई देगा चारों तरफ
बस अभाव ही अभाव।
13 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

387 कविताएं

View Profile

SHASHANK SRIVASTAVA

7 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7088 कविताएं

View Profile