लक्ष्य मिला एक अच्छा खासा 274 का,
असंभव नहीं तो मुश्किल था जरूर।
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर,
सचिन के सिर चढ़ किए तांडव नृत्य।।
बड़ बोले पाकिस्तान का,
पहले ही ओवर में मान मर्दन किए।
18 रन लिए, और पांच ओवर में हीं,
आधा सैकड़ा पार कर गए।।
आगे ही आगे बढ़ते गए,
करोड़ों के अरमान पूरे हुए।
मानो विश्व कप जीत गया हो,
जगह जगह फूटने लगे पटाखे।।
बड़बोले पाक का मान मर्दन किए,
राजनेता तक बधाई दे डाले।
सुपर सिक्स में जगह बनाई,
ऑस्ट्रेलिया के बाद नंबर दो पर आई।।
सुपर सिक्स में सौरव सेना ने,
की श्री लंका पर चढ़ाई।
अरमानों पर खरा उतर,
आसानी से फतह दिलाई।।
न्यूजीलैंड से किया अपना,
पुराना हिसाब चुकता।
केन्या को हराकर,
सेमीफाइनल में स्थान किया पक्का।।
सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने,
श्री लंका को हराया।
वहीं भारत ने केन्या को,
घर का राह दिखाया।।
अब आई दूसरी बार,
फाइनल में भीड़ने की बारी।
सामने थी अजेय ऑस्ट्रेलिया,
हर तरह से भारी।।
शुरू में जो टीम लड़खड़ाई थी,
फाइनल तक के सफर में बड़ी कठिनाई थी।
हर जीत पर टीम ने नई स्फूर्ति पाई थी,
करोड़ों के दिलों में फिर से आस जगाई थी।।
इतिहास दोहराने को बस,
एक कदम थे दूर।
आखिर भगवान का भी,
दिया हुआ सब था लूर।।
एक तरफ थी ऐसी टीम,
जो एक भी मैच नहीं हारे।
हम भी उसको छोड़,
एक भी मैच नहीं हारे।।
अंततः आया फाइनल मैच का दिन,
दोनों टीमें पहुंची मैदान में उस दिन।
टॉस जीत फील्डिंग का लिया फैसला,
पहले ही ओवर से भारत का भाग्य फिसला।।
लाख जतन किए, सारा कोशिश बेकार गया,
यहां तक कि बारिश का होना भी बेकार गया।
भाग्य मानो हम से रूठ गया, मुख मोड़ लिया,
1983 के बाद फाइनल में जाना बेकार गया।।
लक्ष्य मिला तीन सौ पचास से ऊपर का,
फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य था।
करो या मरो की स्थिति थी,
बल्लेबाजों के सिर भारी चुनौती थी।।
चुनौती का सामना कर नहीं पाए,
विजय छोड़, हार को गले लगाए।
हार जीत तो लगी हुई है,
बड़ी बात, टीम प्रदर्शन की है।।
टीम भावना जागृत कर,
बारीकियों से कमियों पर नजर रख।
हम लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं,
भारतीय टीम यही सबक दे गई।।
विश्व कप 2007 पहली बार वेस्टइंडीज में,
सोलह टीमें पहुंची 51 मैच खेलने के लिए।
ऑस्ट्रेलिया श्री लंका पहुंचे फाइनल में,
तिरपन रन से ऑस्ट्रेलिया बना चैंपियन।।