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मातृभाषा!... नायिका तूं संस्कृति की

Powari Bhasha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मातृभाषा को निनाद।
        
                                                    
                            
ईश्वर को आय वरदान।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

होसे जहां मंगलगान।
संचारित होसे नव-प्राण।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

संस्कृति की तूं अधिष्ठान।
समाज की तूं अधिष्ठान।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

समाज की एका की प्राण।।
समाज को संगठन की प्राण।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

कोयल की वाणी समान।
अनुभूति देसे तोरो निनाद।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

राखी को बंधन समान।
जोड़न को से तोरो काम।
नायिका तूं संस्कृति की,
तूच संस्कृति को प्राण।।

-ओ सी पटले
2 महीने पहले
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